शशी कुमार केसवानी

लोकसभा चुनाव से पहले मप्र की पांच राज्यसभा सीटों पर चुनाव होना है। भाजपा के पाले में चार और
कांग्रेस को एक सीट मिलेगी। भाजपा की चार सीटों पर दिल्ली दरबार से प्रत्याशी तय होंगे। पार्टी सूत्रों के अनुसार जातीय समीकरणों को साधने के लिए आलाकमान इस बार मप्र के तीन या फिर सभी चार नेताओं को राज्य सभा भेज सकती है। वर्तमान में जयभान सिंह पवैया, सत्यनारायण जटिया, लालसिंह आर्य, अरविंद भदौरिया और रंजना बघेल प्रमुख दावेदार बताए जा रहे हैं।

भाजपा सूत्रों का कहना है कि लोकसभा चुनाव के समीकरणों को देखते हुए आलाकमान राज्यसभा प्रत्याशियों का नाम तय करेगा। हालांकि सूत्रों का कहना है कि भाजपा आलाकमान मध्य प्रदेश को तीन सीटें दे सकती है। पार्टी एक अन्य सीट पर केंद्र से प्रत्याशी भेज सकती है। फिलहाल मध्य प्रदेश से भेजे गए धर्मेंद्र प्रधान और डा. एल मुरुगन का कार्यकाल दो अप्रैल को समाप्त हो रहा है, इन दोनों ही नेताओं को पार्टी लोकसभा चुनाव लड़वाने की तैयारी में है। बचे दो राज्य सभा सदस्य मध्य प्रदेश से हैं। इनमें अजय प्रताप सिंह और कैलाश सोनी का भी कार्यकाल समाप्त होने जा रहा है। मप्र में क्षत्रिय वर्ग से सांसद रहे नरेंद्र सिंह तोमर और राकेश सिंह दोनों को ही केंद्रीय राजनीति से प्रदेश की सियासत में भेज दिया गया है। अरविंद भदौरिया तथा रामपाल सिंह राजपूत विधानसभा चुनाव हार गए हैं, ऐसे में पार्टी किसी बड़े क्षत्रिय चेहरे पर दांव लगा सकती है या कोई नया क्षत्रिय चेहरा ला सकती है। राज्यसभा चुनाव के लिए 8 फरवरी से नामांकन की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। 15 फरवरी तक नामांकन स्वीकार किए जाएंगे। नाम 20 फरवरी तक वापस लिए जा सकेंगे। आवश्यकता होने पर मतदान सुबह 9 से चार बजे तक कराया जाएगा। पांच बजे से मतगणना होगी और फिर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।

छह लोकसभा सीटों पर भाजपा के पर्यवेक्षक नियुक्त
भाजपा ने लोकसभा चुनाव के लिए छह सीटों पर आब्जर्वर नियुक्त किए हैं। जो लोकसभा क्षेत्र में जाकर रिपोर्ट लेंगे। जिनमें वरिष्ठ नेता एवं मप्र सरकार के कद्दावर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को छिंदवाड़ा लोकसभा चुनाव में भाजपा को जिताने की बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है। प्रदेश में छिंदवाड़ा ही एक मात्र ऐसी सीट हैं, जो कांग्रेस के पास है। भाजपा ने जिन सीटों पर पर्यवेक्षक बनाए हैं। उनमें हर सीट पर एक मंत्री और एक संगठन का पदाधिकारी शामिल किया है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय छिंदवाड़ा सीट देखेंगे। मुरैना के लिए राजेंद्र शुक्ल, हेमंत खंडेलवाल, दमोह के लिए जगदीश देवड़ा और आलोक संजर, सीधी के लिए अजय विश्नोई, संपतिया उईके, जबलपुर के लिए गोपाल भार्गव और इंदर सिंह परमार, छिंदवाड़ा के लिए कैलाश विजयवर्गीय और विनोद गोटिया, नर्मदापुरम के लिए राकेश सिंह, अर्चना चिटनिस को जिम्मेदारी सौंपी है।

एक सदस्य के लिए 39 मतों की आवश्यकता
गौरतलब है कि आठ फरवरी से नामांकन की प्रक्रिया प्रारंभ होगी। 15 फरवरी तक नामांकन स्वीकार किए जाएंगे। नाम 20 फरवरी तक वापस लिए जा सकेंगे। आवश्यकता होने पर मतदान सुबह नौ से चार बजे तक कराया जाएगा। पांच बजे से मतगणना होगी और फिर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। राज्यसभा चुनाव के लिए मध्य प्रदेश से रिक्त होने वाली पांच सीटों में से चार भाजपा और एक कांग्रेस के पास है। 230 सदस्यीय विधानसभा में दलीय स्थिति के अनुसार चार सीटें फिर भाजपा को मिलनी तय है। पार्टी के 163 विधायक हैं। एक सदस्य के निर्वाचन के लिए 39 मतों की आवश्यकता होगी। इस हिसाब से देखा जाए तो फिर भाजपा के चार सदस्य चुनकर आएंगे। वहीं, कांग्रेस एक सदस्य निर्वाचित कराने की स्थिति है। कांग्रेस के विधायक की संख्या 66 है, जबकि एक सदस्य भारत आदिवासी पार्टी से है।

बड़े चेहरों पर दांव लगा सकती है भाजपा
भाजपा लोकसभा चुनाव के समीकरण साधने के लिए जातीय और क्षेत्रीय संतुलन को साधने के लिए राज्यसभा प्रत्याशियों का नाम तय करेगी। भाजपा नेताओं के अनुसार पार्टी चाहती है कि एक- एक एससी-एसटी और एक सामान्य वर्ग से प्रत्याशी बनाया जाए। चूंकि, नरेंद्र सिंह तोमर और राकेश सिंह दोनों ही केंद्रीय राजनीति से प्रदेश की सियासत में भेज दिए गए हैं और अरविंद भदौरिया विधानसभा चुनाव हार गए हैं, ऐसे में पार्टी किसी बड़े क्षत्रिय चेहरे पर दांव लगा सकती है या कोई नया क्षत्रिय चेहरा ला सकती है। ग्वालियर-चंबल में केवल जयभान सिंह पवैया का ही ऐसा चेहरा है। वहीं, अनुसूचित जाति वर्ग से पार्टी और संघ सत्यनारायण जटिया को एक अवसर देना चाहती है। जटिया भाजपा के वरिष्ठ नेता हैं और इन दिनों संसदीय बोर्ड के सदस्य भी हैं। पहले वे लंबे समय तक उज्जैन से सांसद रहे और अटल सरकार में मंत्री भी रहे। विकल्प के रूप में प्रदेश संगठन ने लालसिंह आर्य का नाम भी रखा है। अनुसूचित जनजाति वर्ग से रंजना बघेल को भी पार्टी ने लोकसभा या राज्यसभा में भेजने का आश्वासन दिया था। ओबीसी वर्ग से मुख्यमंत्री होने के कारण भाजपा अन्य वर्ग और भौगोलिक क्षेत्र के बीच संतुलन साधना चाह रही है। फिलहाल यह तय नहीं किया गया है कि मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में हारने वाले नेताओं को पार्टी राज्य सभा भेजेगी या नहीं, यदि ऐसा हुआ तो कई बड़े दावेदारों के नाम कट जाएंगे।

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, Challenge News Paper

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