शशी कुमार केसवानी

नमस्कार दोस्तों आइए आज बात करते हैं एक ऐसे अभिनेता की जिसके अभिनय में इतनी असलियत दिखती है कि जैसे कोई एक्टिंग न करके असल जिंदगी ही जी रहा हो। ऐसे अभिनेताओं की मुश्किल यह रहती है कि उन्हें इंडस्ट्री में संघर्ष बहुत करना पड़ता है। हालांकि उनका काम करने का हौंसला तो बहुत बड़ा होता है, पर दुर्भाग्य यह रहता है कि इन अभिनेताओं को कोई बहुत बड़े रोल नहीं मिलते हैं। जबकि इनकी काम करने की क्षमता किसी हीरो से कहीं ज्यादा होती है। जी हां दोस्तों आज मैं बात कर रहा हूं दिलों पर राज करने वाले विजय राज की। जिसे कई लोग कौआ बिरयानी बोलते से ही पहचान जाते हैं। हालांकि विजय राज के लिए कई बड़े अभिनेताओं का कहना है कि उन्हें देखकर बिलकुल नहीं लगता की वह इस लेबल की एक्टिंग करते हैं। यहां तक की कई निर्माता-निर्देशकों का मानना है कि विजय की अभिनय की क्षमता के हिसाब से उसे अभी तक वह काम नहीं मिला है जो उसे मिलना चाहिए। ऐसा ही सदी के महानायक अमिताभ बच्चन का भी मामना है। मेरी व्यक्तिगत राय है कि ऐसे अभिनेता कम ही होते हैं। विजय राज ने भोपाल में काफी लंबा समय गुजारा है। और वे अक्सर आते भी रहते हैं। कई बार उनसे मुलाकात होती है, बातों-बातों में कई उनके जीवन के अनछुए पहलुओं पर चर्चा होती है। सब तो मैं एक बार में तो नहीं बता सकता पर कुछ चंद पहलुओं पर नजर डाल सकते हैं। तो आई आज बात करते हैं विजय राज की…

विजय राज को कुछ लोग उनके नाम से भले ही न जानते हों लेकिन हिंदी फिल्में देखने वाला शायद ही ऐसा कोई व्यक्ति होगा जिसने उनकी कॉमेडी और लाजवाब एक्टिंग को न देखा हो। आज ज्यादातर लोग उन्हें उनके नाम की बजाए फिल्मों में उनके शानदार काम की वजह से जानते हैं। विजय राज ने अपने हर किरदार में जान फूंक देने वाली एक्टिंग कर लोगों को खुश किया है। 10 साल तक थिएटर करने के बाद ही वह फिल्मों में आए और यहां भी उनके काम को पसंद किया गया। विजय राज का जन्म दिल्ली में 5 जून 1963 को एक साधारण से परिवार में हुआ था। पढ़ाई लिखाई में विजय ठीक-ठाक थे। दिल्ली से ही 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्हें दिल्ली के जाने माने किरोड़ीमल कॉलेज में एडमिशन मिल गया। कॉलेज के ही थियेटर ग्रुप से जुड़कर वो स्ट्रीट प्ले और मंचीय नाटक किया करते थे। उन्हें अपनी एक्टिंग के लिए काफी तारीफें मिलती। विजय राज ने थिएटर से अपने एक्टिंग करियर की शुरूआत की थी। कॉलेज पास करते करते वो तय कर चुके थे कि उन्हें अब एक्टिंग में ही करियर बनाना है। लेकिन उन्होंने बॉलीवुड में जाने के बारे में कभी नहीं सोचा था। उनका करियर प्लान बस यही था कि कैसे भी वो एक पॉपुलर आर्टिस्ट बन जाएं और थियेटर से ही पैसा कमाएं। इसके लिए उन्होंने 10 साल तक थियेटर ही किया।

बॉलीवुड में अभिनेता विजय राज ने कई बड़ी फिल्मों में काम किया है लेकिन इन फिल्मों में अभिनेता का किरदार ज्यादा लंबा नहीं रहा। इसके बावजूद उनकी पहचान एक खास रूप में जानी जाती है। 2004 में आई रन फिल्म जिसमें लीड रोल में तो अभिषेक बच्चन थे लेकिन विजय राज इस फिल्म से लोगों के बीच इतना फेमस हुए कि इस फिल्म को उनके कॉमीडी सीन से जानने लगे। इस फिल्म में निभाया गया उनका कौआ बिरयानी वाला सीन इतना पॉपुलर हुआ कि लोगों ने सिर्फ विजय राज की कॉमेडी देखने के लिए ये फिल्म देखी। उनकी एक्टिंग और कॉमेडी इस फिल्म से काफी हिट हुई और फिर बालीवुड में आज तक फ्लॉप नहीं हुए। पिछले दिनों आलिया भट्ट की फिल्म ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ में विजय ‘राजिया बाई’ के किरदार में नजर आए थे और इस रोल को उन्होंने पूरी ईमानदारी के साथ निभाया। इस फिल्म में विजय राज के काम को खूब पसंद किया गया। सोशल मीडिया पर यूजर्स ने आलिया के साथ साथ विजय राज के काम की भी खूब तारीफ की। विजय राज फैंस के बीच फिल्मों में अपनी कॉमेडी के लिए जाने जाते हैं। लेकिन फिल्म ‘डेली बेली’ में विजय डॉन के किरदार में दिखे थे। लेकिन फिल्म में डॉन बनकर विजय राज ने लोगों को डराने की बजाय हंसाने का काम किया था। अभिनेता के काम को दर्शकों को खूब पसंद किया। वहीं अक्षय कुमार और कटरीना कैफ की फिल्म ‘वेलकम’ में भी विजय राज ने अपनी दमदार एक्टिंग से खूब तारीफ बटोरी थी। इस फिल्म में विजय ने नकली डायरेक्टर का किरदार निभाया था और वह नाना पाटेकर को एक्टिंग सिखाते हुए नजर आए थे। इस फिल्म में भी उन्होंने अपनी शानदार डायलॉग डिलीवरी से सबको इम्प्रेस कर दिया था। फिल्म ‘धमाल’ में विजय राज अपने किरदार को शांत और धैर्य स्वभाव के साथ एक लेवल और ऊपर लेकर गए थे। उन्होंने अपनी शानदार कॉमेडी से सबको हंसाया। इस फिल्म में उनका रोल पांच मिनट से भी कम का था, लेकिन इसके बावजूद वह फैंस का ध्यान अपनी ओर खींचने में कामयाब रहे थे।

जब बिस्किट खाकर गुजारे दिन, खराब थी हालत
नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपनी बायॉग्रफी में उन दिनों के बारे में बताया था जब वह और विजय राज रूममेट थे और हालत इतनी खराब थी कि पार्ले-जी बिस्किट खाकर गुजारा करते थे। लेकिन विजय राज ने खुद कभी अपने स्ट्रगल या मुश्किल भरे दिनों के बारे में कभी किसी को कुछ नहीं बताया। नवाज ने बताया था कि उनके और विजय राज के दिन इतने खराब थे कि वह नाश्ते से लेकर लंच और डिनर भी सिर्फ पार्ले-जी बिस्किट और चाय ही लेते थे। क्योंकि इतने पैसे ही नहीं थे कि खाने का जुगाड़ कर सकें। फिर वह वक्त भी आया जब बिस्किट भी निपट गए।

स्कूली पढ़ाई के बाद थिएटर
विजय राज पढ़ाई में अच्छे थे। उन्होंने दिल्ली से स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई पूरी की। चूंकि ऐक्टिंग का चस्का था। कलाकार आदमी बनना था, इसलिए विजय राज कॉलेज में ही थिएटर ग्रुप से जुड़ गए। वह छोटे-मोटे नाटकों में हिस्सा लेने लगे। कॉलेज खत्म होते-होते विजय राज के मन में ऐक्टर बनने का ख्वाब पूरा रूप ले चुका था। उन्होंने ठान लिया था कि वह कुछ भी करके ऐक्टर बनकर रहेंगे।

नसीरुद्दीन शाह की बदौलत पहला मौका, खुली किस्मत
ऐक्टर बनने का ख्वाब आंखों में लिए विजय राज मुंबई आ गए। मुंबई आने से पहले विजय राज ने एनएसडी-नैशनल स्कूल आॅफ ड्रामा की रिप्रेटरी कंपनी में काम किया था। इसी के दौरान नसीरुद्दीन शाह की पहली मुलाकात विजय राज से हुई। नसीरुद्दीन शाह ने ही विजय राज का नाम फिल्म ‘भोपाल एक्सप्रेस’ के लिए सुझाया। यह 1999 की बात है। नसीरुद्दीन शाह उस वक्त ‘भोपाल एक्सप्रेस’ में काम कर रहे थे। नसीरुद्दीन शाह की बदौलत विजय राज को इस फिल्म में काम मिल गया। इस तरहविजय राज ने 1999 में बॉलिवुड की दुनिया में कदम रखे।

विजय राज ने ही शुरू किया था कॉमेडी का नया अध्याय
विजय राज को कुछ लोग भले ही उनके नाम से न जानते हों, लेकिन सभी को उनकी कॉमेडी और लाजवाब एक्टिंग जरूर याद होगी। विजय राज वह शख्सियत हैं कि जिस फिल्म में वह हों अगर वो फ्लॉप हो जाए तो भी अभिनेता का किरदार हमेशा हिट रहता है। विजय राज वह अभिनेता हैं, जिनका इंडस्ट्री में कोई माई-बाप नहीं है। उन्होंने सिर्फ अपनी मेहनत की बदौलत सफलता के झंडे गाड़े हैं। उनका हर किरदार इतना बेहतरीन और कॉमेडी से भरा हुआ होता है कि सोचने मात्र से ही हंसी आ जाए। साल 2004 में आई फिल्म रन जिसमें लीड रोल में भले ही अभिषेक बच्चन थे, लेकिन बाजी मार ले गए विजय राज। इस फिल्म का कौआ बिरयानी और छोटी गंगा वाला सीन इतना फेमस हुआ है कि लोग उनको कॉमेडी सीन की वजह से जानने लगे हैं। आज अभिनेता अपना 59वां जन्मदिन मना रहे हैं। इस खास मौके पर जानते हैं विजय राज के बारे में कुछ अनसुनी बातें-

10 साल तक किया थियेटर
5 जून 1963 को एक साधारण से परिवार में जन्मे विजय पढ़ने में ठीक-ठाक थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने दिल्ली के किरोड़ीमल कॉलेज में एडमिशन ले लिया। कॉलेज के ही थियेटर ग्रुप के साथ जुड़कर वह स्ट्रीट प्ले और नाटक का मंचन करते थे। विजय का करियर प्लान सिर्फ यही था कि किसी तरह वह एक मशहूर आर्टिस्ट बन जाएं और थियेटर से पैसा कमाएं। इसके लिए उन्होंने करीब 10 साल तक सिर्फ थियेटर ही किया। नसीरुद्दीन शाह बने गुरु- कॉलेज से निकलने के बाद विजय राज ने नेशनल स्कूल आॅफ ड्रामा की परीक्षा दी, जिसमें इनका चयन हो गया। एक बार एनएसडी में विजय राज एक प्ले कर रहे थे। इस दौरान नसीरुद्दीन शाह की नजर विजय राज पर पड़ गई। उन्होंने विजय को मुंबई बुला लिया। मुंबई में काम का सपना लिए जब विजय राज माया नगरी पहुंचे तो उनकी आंखों में सफलता की बुलंदियों को छूने का ख्वाब था।

भोपाल एक्सप्रेस थी पहली फिल्म – मुंबई पहुंचकर विजय राज की मुलाकात नसीरुद्दीन से हुई। उन दिनों नसीर साहब फिल्म भोपाल एक्सप्रेस की शूटिंग कर रहे थे। नसीरुद्दीन ने विजय राज के लिए फिल्म में एक छोटा सा रोल मांगा। इस तरह उनकी पहली फिल्म भोपाल एक्सप्रेस थी। विजय राज को राम गोपाल वर्मा की फिल्म जंगल में भी काम करने का मौका मिला। टर्निंग पॉइंट साबित हुई ‘रन’- बेहतरीन हिट फिल्म की तलाश में उन्होंने डायरेक्टर मीरा नायर की फिल्म मॉनसून वेडिंग में पीके दुबे का किरदार निभाया। दर्शकों को उनका ये कॉमिक अंदाज बेहद पसंद आया, जिसके बाद उनके अभिनय की खूब तारीफ हुई। इस फिल्म के लिए अभिनेता को बेस्ट कॉमेडियन का नॉमिनेशन मिला। इसके बाद साल 2004 में आई फिल्म ‘रन’। ये विजय के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई। इस फिल्म में विजय राज ने गणेश के किरदार में अपनी उल्टी-सीधी हरकतों की वजह से लोगों को खूब हंसाया।

कॉमेडी के अलावा आवाज भी है दमदार- ‘रन’ के बाद तो विजय राज ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। इसके बाद उन्होंने धमाल, डेढ़ इश्किया, वेलकम और गंगूबाई काठियावाड़ी जैसी फिल्मों में दमदार किरदार निभाए। विजय राज अपनी कॉमेडी के अलावा दमदार आवाज के जरिए भी जाने जाते हैं। आज कई फिल्मों में एक नैरेटर के रूप में आपको उनकी आवाज सुनने को मिल जाएगी। इसके अलावा कई एड में भी उन्होंने अपनी आवाज दी है।

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, Challenge News Paper

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