CHALLENGE, भोपाल।
रविवार का दिन ईदगाह हिल्स के रहवासियो के लिये खास था, यह पहला मौका था जब सिंधी कम्यूनिटी हाल में गुरुनानक टेकरी सिंधी पंचायत द्वारा लव जिहाद, साइबर सुरक्षा, डिजिटल गिरफ्तारी, बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं फ्रÞॉड, साइबर सुरक्षा व सोशल मीडिया एवं महिलाओं और परिवारों के खिलाफ अपराध का प्रभाव जैसे कई महत्वपूर्ण विषयों पर लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से एक सेमिनार का आयोजन किया गया। इस सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में सीनियर एडवोकेट पुरुशोत्तम पंजवानी और उनकी टीम, साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट हर्ष वाधवानी उपस्थित रहे। इस सेमिनार की शुरूआत एडवोकेट पुरुशोत्तम पंजवानी ने की। जिसमें बताया कि साइबर क्राइम किस तरह से घटित होते हैं और उससे होने वाले दुष्परिणामों का भी वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि आजकल के बच्चे-बच्चियां बड़ों से कैसे व्यवहार करते हैं, रात को क्या देखते हैं? यह सब हमारे संस्कारों पर निर्भर करता है। संयुक्त परिवार की भावना के बजाय एकल परिवार को बढ़ावा दिया जा रहा है। आज पूरे परिवार को एक साथ बैठ अपने बच्चों के साथ समय बिताना चाहिए, और ज्यादा से ज्यादा आॅनलाइन खरीदारी से दूर रहने की बात कही। पंजवानी ने कानून में महिलाओं के अधिकारो के बारे में विस्तार से चर्चा की। इसके बाद साइबर सुरक्षा एक्सपर्ट हर्ष वाधवानी ने आज के जीवन में साइबर सुरक्षा, डिजिटल गिरफ्तारी, साइबर क्राइम के प्रति सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया, साथ ही आज के जीवन में इस तरह के हाईटेक क्राइम से कैसे बचा जाए इसके लिए विस्तार से प्रोजेक्टर के (स्क्रीन) के माध्यम से जानकारी देकर उपस्थित महिलाओं एवं बच्चों को सचेत किया।

इस अवसर पर वक्ता नरेन्द्र मंगवानी ने भी आॅनलाइन शॉपिंग से हो रहे दुष्परिणाम के बारे में जानकारी दी। सेमिनार में पुरुषों एवं महिलाओं ने इन एक्पर्ट से खुल कर अपने पर्सनल सवाल पूँछे और एक्सपर्ट द्वारा काफी सरल व सहज तरीके के इन सभी सवालो का जवाब दिया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से जयकिशन लालचंदानी, अमर दावानी, दीपक राजानी, राजेंद्र मनवानी, मनीष दरयानी, नरेश तलरेजा, मुस्कान राजानी, सरिता कंजानी, अनीता सचदेव, हेमा कंजानी, जया गोगिया, सानिया मनवानी, शारदा कंजानी, हर्षा दादलानी, सोनल लालचंदानी, नीलम भुरानी, पलक दादलानी सहित सैकडो की संख्या में महिलायें एवं बड़ी संख्या में बच्चियाँ उपस्थित हुई। पर समाज ने एक क्षेत्र के लोगों के लिए यह आयोजन करके समाज के अन्य युवाओं को कार्यक्रम से दूर रखा। जबकि कोई भी मोहल्ला, पंचायत या सामाजिक संस्था किसी भी मोहल्ले या किसी भी क्षेत्र की होकर शहर भर की होनी चाहिए। जिसका लाभ समाज के सभी वर्गों को मिलना चाहिए। समाज को जिस कार्पोरेट स्टाइल में ढालने की कोशिश की जा रही है, व्यक्तिगत तौर पर यह किसी के लिए अच्छा हो सकता है, लेकिन जब समाज के अंतिम व्यक्ति को न्याय और जानकारी न मिले तब तक चीजें अधूरी ही हैं। हम उम्मीद करते हैं कि अगली ऐसे आयोजनों में समाज के सभी क्षेत्रों के लोगों को जोड़ा जाएगा।







