शशी कुमार केसवानी

नमस्कार दोस्तों आइए आज बात करते हैं एक ऐसे अभिनेता की जिसकी एंट्री पर देशभर में ऐसा हल्ला मचा था कि जिसके बारे में बहुत कम ही लोग कल्पना कर सकते हैं। मैं बात कर रहा हूं। सन 1981 की जब अचानक एक चॉकलेटी हीरो ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया था। हालांकि इस हीरो के पिता को लोग जुबली कुमार के नाम से जानते थे। पर अपने मूलत: कंजूस स्वभाव के लिए मेरे जैसे लोग उन्हें बहुत करीब से जानते थे। यह अभिनेता फिल्म इंडस्ट्री को एक अलग दिशा में ले जाने वाला पहला व्यक्ति था जिसने फिल्मों से कमाया पैसा रियल स्टेट में में लगाया और आज भी उसके नाम का सिक्का मुंबई के साथ साथ देशभर में चलता है। जी हां मैं बात कर रहा हूं राजेन्द्र कुमार के बेटे कुमार गौरव की। जो अपने पिता के द्वारा बनाए पथ पर आगे तो बढ़ा, पर अपने स्वभाव के कारण फिल्मों से धीरे-धीरे आउट होता चला गया। जिसके कारण सफल अभिनेता होने के बावजूद फिल्मों से गायब होने की बड़ी वजह बददिमागी व पैसे की लालच ने उन्हें फिल्मों से अलग तो कर दिया पर व्यापार में ज्यादा होते आए। आज भी उनका रियल स्टेट व भारत से लेकर मालदीव तक ट्रैवलिंग का काम जोरों पर चल रहा है। किराए की लत पिता ऐसी लगाकर गए थे जो आज भी पूरी तरह से खून की रवानियों में दौड़ रही है। हालांकि मेरे बहुत ही व्यक्तिगत संबंधों के बाद भी यह कहने में कभी संकोच नहीं करता कि इस व्यक्ति ने हमेशा पैसे को प्राथमिकता दी है। यहां तक की अपने साले से भी पैसों के लिए कई बार रिश्ते बिगाड़े हैं। तो आइए आज बात करते हैं ऐसे कुमार गौरव की जिनके कई अनछुए पहलू रहे हैं।

कुमार गौरव का जन्म 11 जुलाई 1960 को हुआ था। वह एक अभिनेता भारतीय व्यवसायी हैं जिन्होंने हिंदी सिनेमा में काम किया है । अभिनेता राजेंद्र कुमार के बेटे , गौरव ने लव स्टोरी , तेरी कसम , स्टार , नाम और कांटे जैसी कई फिल्मों में काम किया है । कुमार गौरव का जन्म मनोज तुली के रूप में हुआ था। वह अभिनेता राजेंद्र कुमार और शुक्ला ( हिंदी फिल्मों के बहल परिवार से ) के पुत्र हैं । 2 साल की डेटिंग के बाद 1984 में उन्होंने नम्रता दत्त (1962) से शादी की, जो संजय दत्त की बहन और सुनील दत्त और अभिनेत्री नरगिस की बेटी हैं । उनकी दो बेटियां हैं, साची कुमार जिनकी शादी निमार्ता कमाल अमरोही के पोते बिलाल अमरोही से हुई है और सिया कुमार जिनकी शादी आदित्य से हुई है। कुमार की मां शुक्ला के भाई, निर्देशक रमेश बहल और निर्देशक श्याम बहल हैं । उनके चचेरे भाई श्याम के बच्चे अभिनेता रवि बहल और अभिनेत्री गीता बहल के साथ-साथ रमेश के बेटे गोल्डी बहल हैं ।

उनकी साल 1981 में रिलीज हुई फिल्म ‘लव स्टोरी’ ने बड़े पर्दे पर धूम मचा दी थी। इस फिल्म के लीड हीरो कुमार गौरव ने अपनी डेब्यू फिल्म से लोगों को अपनी दीवाना बना दिया था। लड़कियां उन पर मरने लगी थीं। हिंदी सिनेमा के मशहूर एक्टर रह चुके राजेंद्र कुमार के बेटे कुमार गौरव को इस फिल्म ने रातोंरात एक मशहूर स्टार बना दिया था। फिल्म में उनके साथ एक्ट्रेस विजयता पंडित नजर आई थीं। इस सुपरहिट डेब्यू के बाद कुमार गौरव ने कई और फिल्में कीं लेकिन उन्हें सफलता नहीं मिल पाई। आइए आपको बताते हैं कि उनसे ऐसी कौन सी गलती हुई थी कि वह फिल्मों से दूर हो गए।

कुमार गौरव की पहली फिल्म थी सुपरहिट- कई फिल्मों के फ्लॉप होने के बाद कुमार गौरव एक्टिंग से दूर होने लगे और देखते ही देखते वह फिल्मों से गायब हो गए। आपको बता दें कि कुमार गौरव ने साल 1981 में सुपरहिट डेब्यू करने के बाद ‘तेरी कसम’, ‘हम हैं लाजवाब’, ‘दिल तुझको दिया’, ‘आज’, ‘गूंज’ और ‘प्रतिज्ञाबध’ जैसी कई फिल्में की थीं। लेकिन इनमें से किसी भी फिल्म में वह सफलता हासिल नहीं कर पाए। दरअसल इसकी वजह नई हीरोइनों संग काम करने से इनकार करने को माना जाता है।

मंदाकिनी के साथ काम करने से किया था इनकार- जानकारी के अनुसार जब कुमार गौरव अपनी पहली फिल्म ‘लव स्टोरी’ की शूटिंग कर रहे थे तो उसी दौरान एक्ट्रेस मंदाकिनी भी फिल्मों में एंट्री करने की तैयारी कर रही थीं। आपको बता दें कि मंदाकिनी ने राज कपूर की फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ से बॉलीवुड में डेब्यू किया था, लेकिन इस फिल्म से पहले उन्हें ‘शिरीन फरहाद’ मूवी के लिए साइन किया गया था। इसी फिल्म से मंदाकिनी अपने एक्टिंग करियर की शूटिंग करने वाली थीं।

कुमार गौरव रातोंरात बन गए थे स्टार- फिल्म ‘शिरीन फरहाद’ में प्रोड्यूसर दिनेश बंसल मंदाकिनी के साथ कुमार गौरव को लेना चाहते थे। हालांकि उस समय कुमार गौरव अपनी डेब्यू फिल्म ‘लव स्टोरी’ की शूटिंग में बिजी थे। ऐसे में दिनेश बंसल और मंदाकिनी ने कुमार गौरव की डेब्यू फिल्म के रिलीज होने का इंतजार किया था। लेकिन जब फिल्म ‘लव स्टोरी’ रिलीज हुई तो वह सुपरहिट साबित हुई और इस मूवी ने कुमार गौरव को रातोंरात स्टार बना दिया था। कहा जाता है कि इसके बाद कुमार गौरव ओवर कॉन्फिडेंस से भर गए थे। उन्होंने अपनी डिमांड बढ़ा ली थी।

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उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरूआत साथी नवोदित अभिनेत्री विजयता पंडित के साथ लव स्टोरी (1981) से की, जिसे उनके पिता ने निर्मित किया था, जिन्होंने फिल्म में उनके साथ अभिनय भी किया था। यह फिल्म बॉक्स आॅफिस पर लम्बे समय तक चली; न केवल इसकी अभिनव कहानी के लिए, बल्कि राहुल देव बर्मन और नए प्रमुख नवोदित कलाकारों के यादगार संगीत के लिए भी। कई युवाओं ने राहुल रवैल द्वारा निर्देशित फिल्म में उनके चरित्र का अनुकरण करना शुरू कर दिया। उनकी अगली फिल्म, 1982 में अभिनेत्री पूनम ढिल्लों के साथ रिलीज हुई तेरी कसम औसत कमाई वाली फिल्म थी। उसी वर्ष उन्होंने म्यूजिकल स्टार में अभिनय किया जो अच्छा प्रदर्शन करने में असफल रही लेकिन इसका संगीत लोकप्रिय था।

1985 में, उन्होंने महेश भट्ट की टेलीविजन फिल्म जनम में अभिनय किया । इस फिल्म में उनका संयमित प्रदर्शन आज भी उनके करियर का सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। अगले वर्ष उन्हें नाम (1986) के साथ बॉक्स आॅफिस पर दूसरी हिट मिली, जो फिर से महेश भट्ट की फिल्म थी जिसे उनके पिता ने निर्मित किया था और उनके साले संजय दत्त ने भी मुख्य भूमिका निभाई थी। नाम की सफलता के बावजूद , गौरव के करियर में गिरावट आई क्योंकि उनकी बाद की सभी फिल्में बॉक्स आॅफिस पर अच्छा प्रदर्शन करने में असफल रहीं।

अपनी पिछली फिल्मों जनम और नाम का निर्माण करने के बाद , उनके पिता ने 1993 की फिल्म फूल से उनके करियर को पुनर्जीवित करने की कोशिश की , जिसमें उनकी जोड़ी अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के साथ थी । फिल्म में उनके पिता और ससुर सुनील दत्त भी सहायक भूमिका में थे। इसके बाद उन्होंने अभिनय से एक लंबा ब्रेक ले लिया और 1996 में उनकी केवल दो फिल्में रिलीज होने में देरी हुई। 1999 में, उन्होंने कुछ टेलीविजन श्रृंखलाओं में अभिनय किया।

2000 में, उन्हें बड़े पर्दे पर फिर से विलंबित रिलीज गैंग में देखा गया, जो निर्देशक मजहर खान के खराब स्वास्थ्य के कारण लगभग एक दशक तक निर्माण में रही थी । 2002 में, उन्होंने संजय गुप्ता द्वारा निर्देशित और अमेरिकी पंथ हिट रिजर्वोयर डॉग्स (1992) की रीमेक क्राइम थ्रिलर कांटे में छह नायकों में से एक की भूमिका निभाई । कांटे 2002 की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी। कांटे आज तक उनकी आखिरी बॉलीवुड फिल्म है।

2004 में, वह रोहित जगेसर द्वारा निर्देशित अपनी पहली अमेरिकी फिल्म गुयाना 1838 में दिखाई दिए। यह फिल्म उन्नीसवीं शताब्दी के दौरान गुलामी के उन्मूलन के बीच गिरमिटिया मजदूरों के रूप में ब्रिटिश उपनिवेश ब्रिटिश गुयाना (वर्तमान गुयाना ) में पहुंचने वाले भारतीयों की कहानी बताती है। 2006 में, उन्होंने मूक फिल्म माई डैडी स्ट्रॉन्गेस्ट में अभिनय किया , जो आज तक उनकी आखिरी अभिनय भूमिका है। वह अब एक कंस्ट्रक्शन कंपनी चलाता है।

Shashi Kumar Keswani

Editor in Chief, Challenge News Paper

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