JAIPUR चैलेंज संवाददाता
करौली दंगों की डराने वाली सैकड़ों तस्वीरों के बीच एक तस्वीर उम्मीद की भी थी। जब एक कॉन्स्टेबल बच्ची और उसकी मां को आग की लपटों के बीच से सुरक्षित निकालकर ला रहे थे। कॉन्स्टेबल नेत्रेश शर्मा का नाम आज पूरा देश जानता है। भास्कर आज आपको उस तस्वीर के बाकी दो किरदारों से मिला रहा है। बच्ची पीहू और उसकी मां विनिता अग्रवाल।
पांच दिन हो चुके हैं, लेकिन विनिता (34) के जेहन में अब भी वो मंजर बिल्कुल ताजा है। वो अपनी ढाई साल की बेटी के साथ आग की लपटों में घिरी थीं। जब भी वो मंजर याद आता है, आंखें नम हो जाती हैं। कहती हैं, एक ही चिंता थी- मुझे कुछ भी हो जाए, मेरी बेटी को आंच भी नहीं आनी चाहिए। यही चिंता पति के लिए भी थी, यही वजह थी कि बार-बार पूछने के बावजूद विनिता ने पति को लोकेशन नहीं भेजी। बस एक ही प्रार्थना करती हैं- जिंदगी में कभी दोबारा भगवान ऐसा मंजर न दिखाए।






